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TECHNICAL CARE

Complete solution of student’s life

आज के दुनिया में यंत्र और तंत्र की व्यवस्था दिन पर दिन बढ़ रहा है इसलिए मनुष्य को और भी जागरुक होने की जरुरत है क्योंकि यंत्रों के गति से ज्यादा मन की गति है जो सबसे गतिवान है इसके चाल का मापदंड किसी वैज्ञानिक के पास नही है।

मनुष्य के आवश्यकता के अनुसार यंत्रों का खोज होता है उसके साथ ही उस यंत्र का नियम बनाया जाता है इसलिए उसके नियम का पालन महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति उन नियमों का पालन नही करता वह सजा भोगता है।

आज प्रत्येक दिन कई हजार लोगों का दुर्घटना होता है जिससे लोग मृत्यु के शिकार या अपाहिज हो जाते है फिर कई लोग समय और नसीब को दोष देकर अपने धुन में मग्न हो जाते है।

इस संसार में प्रत्येक घटना और दुर्घटना का एक कारण होता है जिसमें अधिकतर लोगों की लापरवाही होता है।

इस जगत में मनुष्य का शरीर सबसे अद्भुत यंत्र है इसलिए सबसे पहले शरीर को संचालन करने की ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य है। इसमें मानसिक गति के साथ साथ शारीरिक गति का तालमेल जरुरी है।

मानव शरीर का क्षमता सिमित है लेकिन मानसिक क्षमता असिम है इसी कारण तन और मन का बैलेन्स नही बन पाता हैं। दिन और मौसम के अनुसार शरीर के कार्य और जरुरत है लेकिन मन की जरुरत विभिन्न प्रकार के है। मन का दौर तन को रोगी बना देता है।

मन की व्याग्रता ही रोग और दुर्घटना का मुल कारण है इसलिए तन और मन को संचालित करने के लिए विद्या की जरुरत हैं।

बाहर में बाईक कार जहाज मोबाईल कम्प्युटर इत्यादि यंत्र चलाने के लिए कोर्स कराये जाते है लेकिन शरीर को संचालित करने के लिए कोई कोर्स नही कराया जाता है इसलिए मनुष्य गुमराह और लापरवाह हो जाता है।

आज के दौर में यंत्रों की जरुरत है इसलिए उन यंत्रों के सिद्धांतों की विधिवत जानकारी अनिवार्य है। इस जगत में मनुष्य ही मनुष्य का आधार है इसलिए मानवता का शिक्षा जरुरी है।

इस जगत में अधिकारी व्यापारी पुजारी भिखारी किसान जवान परिवार समाज देश सबका आधार मनुष्य ही है एतएव मनुष्य की समझदारी से ही मनुष्य का हित सम्भव है।

मनुष्य सामाजिक प्राणी है इसलिए एक मनुष्य के ज्ञान से कई मनुष्य का कल्याण होता है वैसे ही एक मनुष्य के मुर्खता से कई मनुष्य का पतन भी हो जाता है।

मनुष्य के मानसिकता से उसके जीवन का निर्वाह होता है इसलिए मानसिकता का पाठ समझना जरुरी है । मनुष्य सबसे ज्यादा मानसिकता में उलझकर ही बर्बाद और रोगी हो जाता है।

आज के भौतिकी यंत्र मनुष्य के मानसिकता और कार्य क्षमता को नष्ट कर रहा है इसलिए उससे सुरक्षा का उपाय जरुरी है। जिस प्रकार कोल्हु का बैल एक जगह पर चलते चलते उसी का आदि हो जाता है उसी प्रकार मनुष्य का सेंस विषयों का दास बन जाता है।

जैसे चिड़िया लम्बे समय तक पिजड़े में बंद रहने से उड़ना भुल जाती है उसी तरह से मनुष्य की मानसिकता विषयों में फस कर खुद को भुल जाती है।

आज का विज्ञान उतम मानसिकता का ही देन है और हिन मानसिकता ही पतन का कारण है इसलिए मानसिकता को समझना नितान्त जरुरी है।

जीवन में और संसार में सब मानसिकता का ही खेल है । मानसिकता से ही सुख और मानसिकता से ही दुख की व्यवस्था है इसलिए सेंस को समझना सबके लिए महत्वपूर्ण है।