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ROUTINE CARE

Complete solution of students life

जीवन में उतम स्वास्थ्य और सफलता की जरुरत है उसके लिए दिनचर्या का देखरेख करना जरुरी है अधिकतर लोग दिनचर्या के लापरवाही से रोगी और असफल होते है।

मानव शरीर प्राकृत का सुक्ष्म व्यवस्था है उसका क्रियाकलाप प्राकृतिक है इसलिए उन क्रियाकलापों को नियमित और विधि पूर्वक करना अनिवार्य है।

नियमों के पालन के लिए नियमों की जानकारी जरुरी है।

मनुष्य अपने छोटे मोटे गलतियों पर ध्यान नही देता जिससे वह हरदम असफल और परेशान रहता है।

दिनचर्या में समय का महत्व और उपयोगिता जरुरी है इस संसार में मुढ़ लोग समय पास करने की व्यवस्था करके अपना दिनचर्या खराब करते है जिससे वह काफी परेशान होते है।

किसी भी आदमी का समय खराब नही होता उसका आचरण खराब होता है । खराब आचरण आदमी का सबकुछ खराब कर देता है।

मनुष्य का आदत आचरण सही होने से उसका व्यवहार सही होता है । सही व्यवहार से मनुष्य का सम्बन्ध और स्वास्थ्य सही रहता है।

मनुष्य का मन आजाद पंक्षी की तरह रहना चाहता है इसलिए वह किसी नियम को मानना नही चाहता है लेकिन शरीर के सुरक्षा के लिए नियम जरुरी है।

अंग्रेजी में एक कहावत है

No other force on the earth can harm you until you harm yourself .

इस धरती पर ऐसा कोइ शक्ति नही है जो मनुष्य को नुकसान पहुंचाए जब तक मनुष्य खुद अपना नुकसान नही कर लेता है।

कर्म के बिना फल का इच्छा करना परिश्रम के बिना सफलता पाना अपना गलती नजर अंदाज करना दुसरे पर हमेशा आश्रित रहना दुसरे के कामयाबी पर जलन रखना गलत लोगों का संग करना यह सब दुख के कारण है।

आत्मनिर्भर बनना अपने आप पर भरोसा करना दुसरों का सहायता करना अपने बुद्धि से कार्य करना अपने अवस्था के अनुसार अपना व्यवस्था बनाना उतम विचार वालों के संग में रहना ये सब सुख के लक्षण है।

जीवन का गणित अनोखा है इसमे फिजिकल केमिकल और बायोलॉजिकल का गहरा संयोग है जीवन में इसकी जानकारी सबसे जरुरी है।

गति मति और छति का हिसाब बहुत ही गहरा है इस समय इसका ध्यान रखना जरुरी है। अपने इच्छा भाव विचार और अभिमान का पहचान करके अपने अवस्था के अनुसार दिनचर्या बिताना जरुरी है।

व्यायाम का सुत्र जानकर उसका नियमित पालन करना जीवन के लिए लाभदायक है।

आज के समय में जीवन में कितना भागमभाग है उसमें हर कदम पर शारीरिक और मानसिक शक्ति की जरुरत है इसके लिए खानपान रहनसहन आहार विहार में सावधानी की जरुरत है।

आज के मानसिक व्याग्रता में मानसिक शांति और आराम की जरुरत है इसके लिए सुत्र की आवश्यकता है।

जीवन में सुख और शांति, सुत्र से मिलता है धन से केवल संसाधन की प्राप्ति होती है । धन से समस्या का समाधान और समस्या दोनों पैदा होता है।