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NASHA CARE

Alcohol is sweet poison without knowledge

आज के युवा वर्ग अधिक तेजी से नशे का शिकार हो रहे है जिससे परिवार में कलह और समाज मे हिंसा बढ़ रहा है। इससे रोग अपराध घटना और दुर्घटना भी हो रहा है। इसका सबसे खतरनाक असर मानव नश्ल पर हो रहा है।

नशा एक प्राकृतिक गुण है जो हर मनुष्य के अंदर होता है। नशिली पदार्थ का सेवन रसायनिक नशा है तो विषय वस्तुओं का आर्कषण मानसिक नशा है।

नशा एक धुन है जो किसी कार्य को करने के लिए प्राकृत व्यवस्था बनाती है लेकिन मनुष्य अज्ञानता के कारण इसे समझ नही पाता है और गुमराह होकर किसी अन्य आदतों में फस जाता है।

नशा आदत और आदत व्यवहार बन जाता है इसलिए मनुष्य अपने आदतों का गुलाम हो जाता है । गुलाम मानसिकता कभी भी आत्मनिर्भर नही हो पाता वह सदा अपने ही आदतों का दास बना रहता है ।

कमजोर मानसिकता थका हुआ मानसिकता हारा हुआ मानसिकता विलासी मानसिकता और अज्ञानी मानसिकता अक्सर नशे का शिकार हो ही जाता है।

पान बिड़ी सिगरेट तम्बाकु भांग गाजा शराब का खोज आयुर्वेद पद्धति से दवा के रुप में किया गया है जिसका प्रयोग रहस्यमय और विधि गुढ़ है। रसायनिक तत्वो में कुछ पदार्थ ऐसे है जो शरीर और मानसिकता को शक्तिशाली बनाता है लेकिन उन तत्वों का प्रयोग नियम और विधि से किया जाता है । इसमें मनमानी देखा देखी और लापरवाही करने से मनुष्य का पतन निश्चित ही हो जाता है। इसमें शारीरिक अवस्था मौसम और समय का ध्यान रखना पड़ता है। नियमों के साथ इसका प्रयोग लाभकारी है अन्यथा मनुष्य का पतन निश्चित है ।

पूर्व काल से ही इसका परिणाम देखा जा रहा है इतिहास इसका गवाह है कि राजाओं और नवाबों का नाश इसी के गलत प्रयोग से हुआ है ।

सामान्य वस्तु के गलत प्रयोग से मनुष्य का पतन हो जाता है फिर तो यह विशेष चिज है। किसी भी विशेष वस्तु के प्रयोग में विशेष सावधानी की जरुरत होती है।

आज की महिलाएं भी अधिक तेजी से नशे का शिकार हो रही है यह समाज के लिए बहुत ही खतरनाक है ।

नशे का प्रयोग तीन तथ्यों से किया जाता है एक शारीरिक थकान दुसरा मानसिक थकान और तीसरा आत्मिक तंत्र साधना के लिए इसलिए इसका युक्ति महत्वपूर्ण है।

किसी भी उर्जा का संचालन उसके नियमों के आधार पर होता है जिससे मनुष्य का विकास होता है अन्यथा विनाश तो होता ही है।

इस संसार में ज्ञान और विज्ञान का उद्देश्य मानव का विकास करना ही है परन्तु इस पहलु पर मनुष्य का नाश ही होता हैं।

अमीर और गरीब दोनों के लिए एक ही नियम है जो व्यक्ति नियमों का पालन करता है वह सदा सुखी रहता है और जो नियमों का अवहेलना करता है वह हमेशा दुख भोगता है।

मानव का शरीर रसायन तत्वों का महायोग है इसकी जानकारी रखना अति आवश्यक होता है रसायन तत्व ही शरीर की शक्ति है इसमें सबसे मुख्य उन तत्वों की समानता है । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उन तत्वों का बैलेन्स अति आवश्यक है अन्यथा रोग होना निश्चित है।

मनमानी खान-पान आहार-विहार इत्यादि के लापरवाही से मनुष्य रोगी हो जाता है रोगग्रस्त मनुष्य कभी भी सुखी नही रह पाता है और नाही अपने साथ वालो को सुखी रहने देता है इसलिए सबको निरोग रहने की जरुरत है।

रसायन तत्वों के नियमों के जानकारी के बिना निरोगी रहना असम्भव है इसलिए स्मॅक कोर्स का निर्माण किया गया है इस कोर्स में भाग लेकर इसके जानकारी से लाभ उठावें ।