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EDUCATION CARE

मनुष्य के जीवन में सावधानी और सावधनी के लिए ध्यान की बहुत जरुरत है। ध्यान के अभाव में मनुष्य अपना बहुत कुछ गवा देता है। मनुष्य के लिए विद्या एक महान विषय और जीवन का पहला लक्ष्य है। विद्या हिन मनुष्य पशु के जैसा है।

विद्या के अध्ययन से ही वस्तुओं का सही पहचान एवं प्रयोग की जानकारी प्राप्त होता है जिससे मनुष्य सुखमय जीवन यापन करता है।

विद्या अध्ययन के लिए तिव्र मानसिकता के साथ-साथ कई तरह के नियम संयम और अनुशासन की आवश्यकता हैं। इसके अलावा व्यक्ति के अंदर नम्रता और कर्मठता की भी जरुरत है। छात्र को विद्या अध्ययन के लिए एक जगह से दुसरे जगह जाना पड़ता है जिसमें तरह-तरह के तकलिफों का सामना करना पड़ता है और कई तरह के कुव्यवस्था से बचना पड़ता है

आज का सामाजिक माहौल कई तरह से दुषित है जो नये नये छात्रों को गुमराह कर रहा है। कर्मठता के अभाव में आज के छात्र आसानी से अपराधों में शामिल होकर अपना कैरियर बर्बाद कर रहे है या यौन शोषण और नशा के शिकार हो रहे है।

उच्च प्रतियोगिता महंगाई औरं हार्डवर्क छात्रों का मनोबल तोड़ रहा है इस स्थिति में बिना मार्गदर्शन के छात्र सफल होने में असमर्थ है।

इतिहास गणित भुगोल विज्ञान अर्थशास्त्र जैसे विषयों के अध्ययन में और संसार के गतिविधियों में खुद को प्रतिष्ठित करना और सफल बनाना एक महान कार्य है। बिना सावधानी और युक्ति के किसी उच्चाई पर चढ़ना आसान नही है।

विद्या अध्ययन एक महान कार्य है इसलिए इसमें महान शक्ति और युक्ति की जरुरत है। शारीरिक मानसिक और आत्मिक तीनों शक्तियों को जागृत करके अपने लक्ष्य में लगा देने से हर कार्य आसान हो जाता है।

इस संसार के विज्ञानों में मनुष्य का शरीर खुद एक अनोखा विज्ञान है इसका गणना संचालन और नियंत्रण की विद्या सिखना अनिवार्य है। मनुष्य का मानसिक विकास मातापिता गुरुजनों पर आधारित है परन्तु उसका फिजिकल विकास उसके परिश्रम पर निर्भर है।

इस संसार में बिना परिश्रम के कुछ भी नही मिलता लेकिन आज के लोग बिना परिश्रम के ही सबकुछ पाना चाहते है।

विद्यार्थी जीवन तप और परिश्रम का अवस्था है जो इस समय अपने आपको तपा लेता है वह बाकी समय में सुख भोगता है। जो छात्र इस समय लापरवाही करता है वह बाकी जीवन में पश्चाताप करता है।

विद्या से मानव जीवन अनमोल होता है अन्यथा इस संसार में मनुष्य का किमत ही क्या है।

आत्मनिर्भरता का विद्या सब विषयों में उतम है आत्मनिर्भर मनुष्य कभी विवश और लाचार नही होता ।

विद्या अध्ययन के लिए विद्या अध्ययन की विद्या जानना सबसे पहले जरुरी है।

अंधकार में प्रकाश की जरुरत है जीवन में विद्या की जरुरत है यह जानकर भी लोग नही समझ पाते है।

कई छात्र धन के अभाव में असफल हो जाते है तो कई छात्र धन पाकर असफल है । कोई-कोई बुद्धि के अभाव में असफल है तो कई छात्र गलत संगत में फसकर असफल हो जाते है ।

कई छात्र उम्र के तरंग में फसकर असफल है तो कई छात्र अभिभावक के मुर्खता से असफल है ।

कई छात्र ओवरकाॅनफिडेन्स में फसकर असफल हो जाते है इसलिए आज के युवाओं को स्मॅककोर्स की जरुरत है ।